

Shri Hanuman Chalisa: Vidhi, Vigyan Aur Vardan-Aditya Deo
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यह पुस्तक 'श्रीहनुमान चालीसा' को गहराई से समझने का एक प्रयास है। हममें से कई लोग चालीसा का नियमित पाठ तो करते हैं, पर उसमें छिपे आध्यात्मिक विज्ञान, तत्त्वज्ञान, प्रबंधन-सिद्धांतों और जीवनोपयोगी संदेशों को समझने का प्रयास नहीं कर पाते। यह पुस्तक उसी कमी को पूरा करते हुए पाठक को इसके गूढ़ अर्थों और शिक्षाओं तक सहजता से ले जाने का प्रयास करती है। संत तुलसीदासजी कहते हैं- जानें बिनु न होइ परतीती। बिनु परतीति होइ नहिं प्रीती ।। प्रीति बिना नहिं भगति दिढ़ाई। अर्थात् बिना ज्ञान के विश्वास नहीं, बिना विश्वास प्रेम नहीं, और प्रेम बिना दृढ़ भक्ति नहीं होती। हनुमान चालीसा की प्रत्येक चौपाई केवल घटनाओं का स्मरण नहीं कराती, बल्कि भक्त को प्रभु का ज्ञान देकर भक्ति को दृढ़ बनाती है। यह पुस्तक पाठक को हनुमानजी के जीवन-प्रसंगों से परिचित कराती है- जहाँ वे कर्तव्यपरायणता, समर्पण और भक्ति का मार्ग दिखाते हैं। उनके संदेश सार्वभौमिक, धर्मनिरपेक्ष और सभी के लिए उपयोगी हैं। हनुमानजी के अवतरण का विशिष्ट उद्देश्य ही भक्ति को स्थिर और सशक्त बनाना है। इस पुस्तक में हनुमान चालीसा की प्रत्येक चौपाई का विस्तृत, सरल और तर्कसंगत शंका-समाधान प्रस्तुत किया गया है, जो प्रभु को जानने और भक्ति को दृढ़ करने का मार्ग प्रशस्त करता है।
Language: Hindi
Page No: 152
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