

Mahabharat Ke 51 Prasang | Religious Scriptures And Ethics Book In Hindi-Rajeev Desai
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महाभारत विश्व-साहित्य का सार्वकालिक रत्न है। उसके इक्यावन चयनित प्रसंगों का यह संकलन उसी विराट् उद्यान से चुने गए पुष्पों का गुच्छ है। ये प्रसंग केवल अतीत की कथाएँ नहीं हैं, वे आज भी हमारे जीवन से गहराई से जुड़े हुए हैं। इस पुस्तक में भीष्म की यौगिक मृत्यु, श्रीकृष्ण का सारथ्य, अर्जुन को दिव्यास्त्रों का विस्मरण, विजयप्रदायिनी देवी दुर्गा जैसे अनेक महत्त्वपूर्ण प्रसंगों का सरल और विश्लेषणात्मक शैली में विवेचन किया गया है। ये प्रसंग केवल घटनाएँ नहीं, जीवन की गहरी सीख हैं। प्रत्येक प्रसंग के संदर्भ में उसके निहित अर्थ और तत्त्व को स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है, ताकि पाठक कथा से आगे बढ़कर उसके भीतर छिपे संदेश को समझ सकें। महाभारत की विशेषता यही है कि यह केवल एक महाकाव्य नहीं, एक जीवंत जीवन-दर्शन है। इसके पात्र, उनके निर्णय, उनकी दुविधाएँ और उनकी विजय-पराजय-सब कुछ आज के मनुष्य के अनुभव से अलग नहीं। हर युग में इसे पढ़ने वाला अपना प्रतिबिंब इसमें देख सकता है। महाभारत आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, क्योंकि मनुष्य आज भी उन्हीं प्रश्नों से जूझता है। जब जीवन प्रश्नों से घिरता है, तब यह महाकाव्य केवल उत्तर ही नहीं देता, विवेक भी प्रदान करता है। यह पुस्तक उसी विवेक की खोज का एक विनम्र आमंत्रण है।
Language: Hindi
Page No: 184
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