

Kahaniyon Ki Lata कहानियों की लता Book In Hindi-Lata Kadambari
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हे प्रभु! मुझे उस सामने टेबल पर बैठे धन्ना सेठ के मोटू बेटे की प्लेट में भी मत रखना। कब से अपनी ललचाई नजरों से इधर ही देखे चला जा रहा है। डॉक्टर ने उसे ज्यादा घी-तेल खाने से मना किया है। पहले तो संयम की बातें करेगा, पर फिर चार-पाँच खा ही जाएगा। खाएगा नहीं, मुँह में ठूँसेगा। डकार-पर-डकार लेगा। फिर मेरी क्वालिटी को कोसेगा और सोचने लगेगा कि अब और क्या खाया जाए? हे प्रभु! दुकान के बाहर दिहाड़ी मजदूर खड़ा है। वह अब तक दो-तीन बार मेरी कीमत पूछ चुका है। वह भूखा है। वह मुझे खाना चाहता है, पर पाँच रुपए मुझ पर खर्च करना उसे खल रहा है। फिर भी वह आएगा। भूख से हारकर ही आएगा। वह मुझे देखेगा-परखेगा। तब एक खरीदेगा। भले ही इस खर्च की भरपाई करने के लिए उसे बस के बदले छह मील पैदल चलकर घर लौटना पड़े।
Language: Hindi
Page No: 160
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