

Ateetgatha-Dr. Mamta Chandrasekhar
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1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई ने रणक्षेत्र में अद्भुत वीरता व पराक्रम का परिचय दिया। उनके साहस के किस्सों से लगभग हर भारतीय अवगत है। उनके प्रतिद्वंद्वी सर ह्यूरोज ने भी महारानी लक्ष्मीबाई को सर्वाधिक बहादुर और सर्वश्रेष्ठ वीरांगना माना था। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अपनी वीरता के कीर्तिमान स्थापित करने वाली गढ़ मंडला की रानी अवंतीबाई का नाम भी बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्होंने रणक्षेत्र में अंग्रेजों को नाकों चने चबवा दिए थे। रानी अवंतीबाई के साथ उनकी संरक्षिका गिरधारी बाई ने भी 1857 के संग्राम में बढ़-चढ़कर भाग लिया था और लड़ते-लड़ते अपना बलिदान दिया था। रानी लक्ष्मीबाई की हमशक्ल झलकारी बाई ने भी प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 में अपनी बहादुरी का परचम लहराकर अंग्रेजों को अचंभित कर दिया था। 1857 के समर में शाजापुर की रानी काशीबाई भी बलिदान हुई थीं। दुःखद तथ्य यह था कि स्वाधीनता के बदले विभाजन का जहर पीना पड़ा। इस विभाजन के उपरांत दार्शनिकों का यह कथन सत्य सिद्ध हुआ कि कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है।
Language: Hindi
Page No: 120
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